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Bond Market में क्यों मचा है कोहराम? अमेरिका में 10-Year Yield 5% के करीब, जापान में 30 साल बाद 3% का स्तर

 Bond Market में क्यों मचा है कोहराम? अमेरिका में 10-Year Yield 5% के करीब, जापान में 30 साल बाद 3% का स्तर


दुनिया के Bond Market में इस समय हलचल काफी बढ़ गई है। अमेरिका में 10-Year Treasury Bond Yield 5% के बेहद करीब पहुंच गई है, जबकि जापान की 10-Year Government Bond Yield 3% के स्तर को पार कर चुकी है। जापान में यह करीब 30 साल बाद हुआ है।

Bond Market में हो रही यह हलचल केवल Bonds तक सीमित नहीं है। अमेरिका और जापान की Bond Yield में बदलाव का असर दुनिया भर के शेयर बाजार, करेंसी, विदेशी निवेश और ब्याज दरों पर पड़ सकता है। भारतीय निवेशकों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संकेत बन गया है।



अमेरिका में 10-Year Bond Yield 5% के करीब क्यों पहुंची?

अमेरिका की 10-Year Treasury Yield हाल में तेजी से बढ़ी है और 5% के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी करीब पहुंच गई है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता महंगाई को लेकर है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी Federal Reserve के लिए ब्याज दरों में तेजी से कटौती करना मुश्किल हो सकता है।

इसके अलावा अमेरिका का सरकारी कर्ज भी लगातार बढ़ रहा है। सरकार को बड़ी मात्रा में कर्ज लेने के लिए Treasury Bonds जारी करने पड़ते हैं। जब बाजार में Bonds की Supply बढ़ती है तो निवेशक ज्यादा Yield की मांग कर सकते हैं।

यही वजह है कि लंबी अवधि वाली अमेरिकी Bonds की Yield पर दबाव बना हुआ है।

जापान में 10-Year Bond Yield 3% पार करना इतना बड़ा मामला क्यों है?

जापान लंबे समय तक बेहद कम ब्याज दरों के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन अब वहां स्थिति बदलती हुई दिखाई दे रही है।

जापान की 10-Year Government Bond Yield ने 3% का स्तर पार किया है। यह सितंबर 1996 के बाद पहली बार हुआ है। यानी करीब 30 साल बाद जापान की 10-Year Bond Yield इस स्तर पर पहुंची है।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जापानी निवेशकों ने लंबे समय तक बेहतर Return की तलाश में दूसरे देशों की Bonds और अन्य विदेशी Assets में निवेश किया है।

अगर जापान में घरेलू Bonds से ही ज्यादा Yield मिलने लगे तो जापानी निवेशकों के लिए विदेशी बाजारों में पैसा लगाने की जरूरत कम हो सकती है।

इसका असर Global Bond Market और दूसरे देशों के Financial Markets पर भी पड़ सकता है।


✅✅Bond Yield बढ़ने का मतलब क्या है?


Bond की कीमत और उसकी Yield का संबंध उल्टा होता है।

जब Bond की कीमत गिरती है तो उसकी Yield बढ़ती है और जब Bond की कीमत बढ़ती है तो Yield घटती है।

इसलिए जब किसी देश की Bond Yield तेजी से बढ़ती है तो यह संकेत हो सकता है कि बाजार ज्यादा Return की मांग कर रहा है।

यही वजह है कि अभी Global Bond Market पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

✅✅ भारत पर इसका क्या असर हो सकता है?

अमेरिका और जापान की Bond Yield में बढ़ोतरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

सबसे पहला असर Foreign Investment पर देखने को मिल सकता है। अगर अमेरिकी Treasury Bonds करीब 5% Yield देने लगती हैं तो कुछ विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिका में पैसा लगाना ज्यादा आकर्षक हो सकता है।

ऐसी स्थिति में Emerging Markets से Foreign Investment निकलने का जोखिम बढ़ सकता है।

भारत में Bond Yield पर भी इसका असर पड़ सकता है। भारतीय 10-Year Government Bond Yield हाल में 7% के आसपास पहुंच चुकी है। अगर Global Bond Yields ऊंची रहती हैं तो भारतीय Bond Market पर भी दबाव बना रह सकता है।

✅✅ रुपये पर भी पड़ सकता है असर

Global Bond Market में बदलाव का असर Currency Market पर भी पड़ सकता है।

अगर अमेरिकी Bond Yield बढ़ती है और डॉलर मजबूत होता है तो Emerging Market currencies पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय रुपये पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा अगर Crude Oil की कीमतें भी ऊंची रहती हैं तो भारत के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा Crude Oil आयात करता है।


✅✅क्या शेयर बाजार में Crash आ सकता है?


Bond Yield में तेजी को देखकर सीधे यह कहना सही नहीं होगा कि शेयर बाजार में Crash आने वाला है।

हालांकि, अगर Bond Yield तेजी से बढ़ती रहती है तो शेयर बाजार में Volatility जरूर बढ़ सकती है।

इसका सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनके शेयर पहले से बहुत महंगे Valuation पर कारोबार कर रहे हैं।

जब सुरक्षित निवेश से मिलने वाला Return बढ़ता है तो निवेशक महंगे शेयरों में निवेश करने से पहले ज्यादा सावधानी बरत सकते हैं।

यानी Bond Yield में तेजी का मतलब यह नहीं है कि सभी शेयर गिरेंगे, लेकिन High Valuation वाले शेयरों पर दबाव बढ़ने का खतरा जरूर हो सकता है।


✅✅भारतीय निवेशकों को किन चीजों पर नजर रखनी चाहिए?


आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार को समझने के लिए केवल Nifty और Sensex देखना पर्याप्त नहीं होगा।

निवेशकों को इन संकेतकों पर भी नजर रखनी चाहिए:


  • US 10-Year Treasury Yield

  • Japan 10-Year Government Bond Yield

  • भारत की 10-Year Government Bond Yield

  • US Inflation डाटा
  • Federal Reserve की Interest Rate Policy

  • Crude Oil Prices

  • US Dollar और Indian Rupee

  • Foreign Institutional Investors की Buying और Selling


इन सभी संकेतकों की दिशा मिलकर Global Market का माहौल तय कर सकती है।


✅✅ निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख


वर्तमान स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया में लंबे समय तक चली Low Interest Rate वाली स्थिति अब बदलती हुई दिखाई दे रही है।

अमेरिका में 10-Year Treasury Yield 5% के करीब पहुंचना और जापान में 10-Year Bond Yield का करीब 30 साल बाद 3% के स्तर को पार करना Global Investors के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

भारतीय निवेशकों को इसका मतलब यह नहीं निकालना चाहिए कि बाजार से पैसा निकाल लेना चाहिए। बल्कि ऐसे समय में निवेश करते समय कंपनी की कमाई, कर्ज, Valuation और भविष्य की Growth को ज्यादा महत्व देना चाहिए।

अगर Global Bond Yields ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले समय में Stock Selection और Valuation पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।


✅✅ निष्कर्ष


Global Bond Market में इस समय जो हलचल दिखाई दे रही है, उसके पीछे कई कारण हैं। महंगा Crude Oil, Inflation की चिंता, अमेरिका का बढ़ता सरकारी कर्ज और दुनिया भर में Interest Rate को लेकर बदलती उम्मीदें Bond Yields पर दबाव बना रही हैं।

अमेरिका की 10-Year Treasury Yield 5% के बेहद करीब है, जबकि जापान की 10-Year Government Bond Yield करीब 30 साल बाद 3% के स्तर को पार कर चुकी है।

इसका असर भारत में रुपये, Bond Yield, Foreign Investment और शेयर बाजार की Valuation पर पड़ सकता है।

इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए केवल Nifty और Sensex ही नहीं, बल्कि Global Bond Yield पर भी नजर रखना जरूरी होगा।


✅✅ डिस्क्लेमर: 

यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। इसमें दी गई जानकारी को निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है।

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