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NSE IPO Valuation vs BSE: ₹1,785 पर NSE सस्ता है या महंगा?

  NSE IPO Valuation vs BSE: ₹1,785 पर NSE सस्ता है या महंगा?


NSE IPO अब सिर्फ एक और IPO नहीं रह गया है। भारतीय शेयर बाजार में इसकी मजबूत पकड़, बड़ा profit और लंबे समय से चली आ रही listing की चर्चा ने इसे 2026 के सबसे चर्चित IPOs में शामिल कर दिया है।

लेकिन अब जब NSE ने IPO का price band ₹1,700 से ₹1,785 तय कर दिया है, तो एक सवाल हर निवेशक के मन में होना चाहिए:

"क्या ₹1,785 पर NSE सच में सस्ता है?"

इसका जवाब GMP देखकर नहीं मिलेगा।

इसके लिए NSE की valuation को उसके सबसे बड़े listed competitor BSE से compare करना होगा। और जब हम P/E, EPS, Revenue और Profit को एक साथ देखते हैं, तो NSE IPO की तस्वीर काफी दिलचस्प दिखाई देती है।



 NSE IPO की जरूरी जानकारी

NSE IPO 17 सितंबर 2026 को खुलेगा और 21 सितंबर 2026 को बंद होगा। IPO का price band ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है।

Lot size 8 shares है। इसलिए upper price band पर एक lot के लिए ₹14,280 की जरूरत होगी।


| NSE IPO | जानकारी |

| ------------------ | ------------------ |

| Price Band                    |     ₹1,700 – ₹1,785 |

| Lot Size                                     | 8 Shares |

| Minimum Investment           | ₹14,280 |

| IPO Size                              | लगभग ₹22,568 करोड़ |

| Opening Date                     | 17 सितंबर 2026 |

| Closing Date                         | 21 सितंबर 2026 |

| Expected Listing                   | 24 सितंबर 2026 |

| Issue Type                                | OFS |


लेकिन इन आंकड़ों से अभी यह पता नहीं चलता कि NSE की valuation सस्ती है या महंगी।

इसके लिए सबसे पहले P/E Ratio समझना होगा।


 ✅P/E Ratio से शुरू करें

P/E यानी Price to Earnings Ratio किसी कंपनी की valuation को समझने का सबसे आसान तरीका है।

सीधे शब्दों में:

"P/E बताता है कि कंपनी के ₹1 के profit के लिए market कितने रुपये देने को तैयार है।"

✅ NSE का FY26 EPS करीब ₹41.62 है।

अगर ₹1,785 के upper price band को इससे divide करें:

₹1,785 ÷ ₹41.62 = लगभग 42.9x

यानी NSE IPO करीब 42.9 गुना FY26 earnings के valuation पर आ रहा है।

Lower price band ₹1,700 पर यही calculation करीब 40.8x बैठती है।

अब सवाल यह है कि 42.9x P/E ज्यादा है या कम?

यहीं BSE का comparison काम आता है।


✅✅NSE vs BSE: P/E में कौन महंगा?

BSE के FY26 EPS करीब ₹60.61 के आधार पर उसकी valuation लगभग 52.7x FY26 earnings के आसपास बैठती है।

इसका मतलब NSE और BSE को सिर्फ P/E के आधार पर देखें तो तस्वीर कुछ ऐसी है:


| Valuation               | NSE                        | BSE |


| FY26 EPS               | ₹41.62                      | ₹60.61 |

| Approx. P/E           | 42.9x                        | 52.7x |


यहां NSE की valuation BSE से कम दिखाई देती है।


✅यानी पहली नजर में NSE IPO "BSE के मुकाबले महंगा" नहीं दिखता।

लेकिन क्या इसका मतलब NSE सस्ता IPO है?

जरूरी नहीं।

 सिर्फ P/E देखकर फैसला क्यों नहीं करना चाहिए?

मान लीजिए दो दुकानों का P/E 20 और 40 है।

पहली दुकान ₹20 के valuation पर ₹1 कमाती है, जबकि दूसरी दुकान ₹40 के valuation पर ₹5 कमाती है।

कौन सस्ती है?

सिर्फ P/E देखकर जवाब नहीं दिया जा सकता।

हमें यह भी देखना होगा कि profit कितनी तेजी से बढ़ रहा है, कंपनी कितना return कमा रही है और भविष्य में growth की संभावना कितनी है।

यही नियम NSE पर भी लागू होता है।


✅✅ Profit में NSE और BSE का अंतर

अब दोनों कंपनियों के profit को देखिए।

FY26 में NSE का profit करीब ₹10,302 करोड़ रहा, जबकि BSE का profit करीब ₹2,488 करोड़ रहा।

Revenue की बात करें तो NSE का FY26 revenue करीब ₹16,601 करोड़ था, जबकि BSE का revenue करीब ₹4,834 करोड़ रहा।

यानी NSE का business scale BSE से काफी बड़ा है।

और यही वजह है कि केवल share price देखकर दोनों कंपनियों को compare करना गलत होगा।


 यहां NSE की सबसे बड़ी ताकत दिखाई देती है

NSE का सबसे बड़ा advantage केवल उसका brand नहीं है।

उसकी असली ताकत है:

"बड़ा market share + बड़ा trading ecosystem + मजबूत profitability"

NSE जितना बड़ा transaction ecosystem संभालता है, उसका असर उसकी earnings पर दिखाई देता है।

इसलिए ₹1,785 की कीमत देखकर यह कहना कि NSE महंगा है, अपने आप में पर्याप्त analysis नहीं होगा।

हमें यह भी देखना होगा कि उस कीमत पर हमें कितनी earnings मिल रही हैं।

और यहां NSE का लगभग 42.9x P/E BSE के लगभग 52.7x से कम है।


✅✅लेकिन NSE को BSE से कम P/E क्यों मिल रहा है?

यह सबसे दिलचस्प सवाल है।

अगर NSE का profit और business scale BSE से काफी बड़ा है, तो उसकी valuation BSE से कम P/E पर क्यों हो रही है?

🫵इसका एक कारण यह हो सकता है कि BSE के share price में पिछले वर्षों की तेज growth के कारण काफी re-rating हो चुकी है।

🫵दूसरी तरफ NSE की listing के समय market उसके बहुत बड़े earnings base को ध्यान में रखकर valuation तय कर रहा है।

इसलिए यहां सिर्फ "कौन बड़ा है?" सवाल नहीं है।

सही सवाल है:

"किस कंपनी के लिए आज की कीमत के मुकाबले भविष्य की earnings growth ज्यादा आकर्षक है?"

✅✅ NSE की valuation को समझने का एक आसान तरीका


NSE को तीन अलग-अलग नजरिए से देखिए।

✅"P/E के नजरिए से"

लगभग 42.9x FY26 earnings पर NSE, BSE के लगभग 52.7x से कम valuation पर दिखाई देता है।

✅"Profit के नजरिए से"

NSE का profit BSE से कई गुना ज्यादा है।

✅"Business strength के नजरिए से"

NSE का market position और scale बहुत मजबूत है।

इन तीनों को मिलाकर देखें तो NSE की valuation "बहुत सस्ती" तो नहीं कही जा सकती, लेकिन BSE की तुलना में "reasonable" जरूर दिखाई देती है।


✅✅NSE का ROE भी महत्वपूर्ण है

Valuation analysis में एक और ratio काफी महत्वपूर्ण होता है—ROE यानी Return on Equity।

यह बताता है कि कंपनी shareholders के capital से कितना return पैदा कर रही है।

NSE का historical ROE मजबूत रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों का weighted average ROE करीब 37.9% रहा है।

इससे पता चलता है कि NSE सिर्फ बड़ा business नहीं है, बल्कि अपने equity capital से काफी अच्छा return भी generate करता है।

इसलिए लगभग 43x P/E को अकेले देखकर NSE को महंगा कहना सही नहीं होगा।

✅✅ फिर NSE IPO में risk क्या है?

हर अच्छी कंपनी का मतलब यह नहीं कि उसका share हर कीमत पर अच्छा investment है।

NSE की earnings market activity और trading volumes से प्रभावित होती हैं।

अगर trading activity कम होती है या regulatory changes से certain segments पर असर पड़ता है, तो earnings growth धीमी हो सकती है।

और यही NSE की valuation का सबसे बड़ा सवाल है।हालांकि ये BSE पर भी लागू होता है /

अगर earnings तेजी से बढ़ती रहती हैं, तो आज का 42.9x P/E आने वाले वर्षों में कम दिखाई दे सकता है।

लेकिन अगर earnings growth धीमी हो जाती है और share price बहुत तेजी से बढ़ जाता है, तो यही valuation महंगी हो सकती है।

✅✅GMP से ज्यादा जरूरी क्या है?

IPO के समय सबसे ज्यादा चर्चा GMP की होती है।

लेकिन long-term investor के लिए GMP से ज्यादा जरूरी है:

"P/E + Profit Growth + ROE + Business Strength"

GMP केवल यह संकेत दे सकता है कि grey market में IPO को लेकर sentiment कैसा है।

यह guarantee नहीं है कि NSE की listing उसी premium पर होगी।

इसलिए अगर कोई investor केवल GMP देखकर NSE IPO में पैसा लगाने का फैसला करता है, तो वह valuation का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा छोड़ रहा है।


✅✅ NSE IPO का असली valuation test listing के बाद होगा

NSE की असली valuation IPO allotment या listing के दिन पूरी तरह साफ नहीं होगी।

असल test listing के बाद शुरू होगा।

मान लीजिए NSE ₹2,000 के आसपास list होता है।

अगर EPS ₹41.62 ही रहे तो:

₹2,000 ÷ ₹41.62 = लगभग 48x P/E

अब NSE और BSE की valuation gap काफी कम हो जाएगी।

लेकिन अगर NSE की earnings तेजी से बढ़ती हैं, तो यही valuation समय के साथ ज्यादा reasonable हो सकती है।

यानी investor को सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि "share कितना ऊपर गया?"

उसे यह भी देखना चाहिए:

"Profit उसके मुकाबले कितना बढ़ा?"

यही फर्क अच्छे valuation analysis और सिर्फ price watching में होता है।

✅✅ NSE vs BSE: हमारी नजर में कौन ज्यादा आकर्षक?

अगर केवल FY26 P/E की तुलना करें तो NSE फिलहाल BSE से ज्यादा attractive दिखाई देता है।

लेकिन NSE को "सस्ता IPO" कहना जल्दबाजी होगी।

लगभग 42.9x FY26 earnings का valuation यह बताता है कि NSE को market पहले से ही premium valuation दे रहा है।

हां, BSE के मुकाबले कम P/E, ज्यादा profit और बड़ा business scale NSE के पक्ष में मजबूत points हैं।

इसलिए NSE IPO को सबसे सही तरीके से ऐसे समझा जा सकता है:

"यह bargain IPO नहीं है, लेकिन BSE की तुलना में इसकी valuation ज्यादा reasonable दिखाई देती है।"


## Investor को किन 5 चीजों पर नजर रखनी चाहिए?


NSE IPO में निवेश करने से पहले इन पांच चीजों को जरूर देखें:


 ✅✅Final Verdict


NSE IPO की सबसे दिलचस्प बात केवल यह नहीं है कि यह भारत का बड़ा IPO है।

दिलचस्प बात यह है कि investor को पहली बार NSE और BSE को एक ही industry में listed companies के रूप में compare करने का मौका मिलेगा।

₹1,785 के upper price band पर NSE का FY26 P/E करीब 42.9x बैठता है, जबकि BSE करीब 52.7x के valuation पर दिखाई देता है।

NSE का revenue और profit भी BSE से काफी बड़ा है।

इसलिए valuation के नजरिए से NSE IPO "बहुत सस्ता" नहीं है, लेकिन BSE की तुलना में "reasonable

✅✅ Disclaimer -

"यह लेख केवल educational और informational purpose के लिए है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। IPO में निवेश करने से पहले RHP, financial statements और valuation को स्वयं जांचें तथा अपनी risk capacity के अनुसार निर्णय लें।"

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